
तू है जग के जननी माता
तेरे अनेक रूप है माता
यदि घर में प्रवेश करती है माता
तो घर को स्वर्ग बना देती है माता
यदि घर से रूठ जाय तो
घर को श्मशान बना देती माता
माता तेरे आचल की दो बूँद के प्यासे हम
दो बूँद पिलाकर हमारा जीवन अमर कर दो माता
अगर बोलती है तू मधुर वाणी माता
हमें चढ़ जाती बचपन में भी जवानी माता
हमें खिलाती दूध दही
खुद भूखी सो जाती माता
तू है जग कि जननी माता
तेरे अनेक रूप है माता
तेरे अनेक रूप है माता
यदि घर में प्रवेश करती है माता
तो घर को स्वर्ग बना देती है माता
यदि घर से रूठ जाय तो
घर को श्मशान बना देती माता
माता तेरे आचल की दो बूँद के प्यासे हम
दो बूँद पिलाकर हमारा जीवन अमर कर दो माता
अगर बोलती है तू मधुर वाणी माता
हमें चढ़ जाती बचपन में भी जवानी माता
हमें खिलाती दूध दही
खुद भूखी सो जाती माता
तू है जग कि जननी माता
तेरे अनेक रूप है माता
abhay you are good blogger
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